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खुद से जब खुद की बात होती है
Poet
खुद से जब खुद की बात होती है, वो घड़ी लाज़वाब होती है। ...
खुद से जब खुद की बात होती है, वो घड़ी लाज़वाब होती है। नजर झुका के पढ़ लिया करो किताबे दिल, ये सारे सवालों का ज़वाब होती है। खुद से अच्छा दोस्त कहां पाओगे, ये दोस्ती बड़ी नायाब होती है। निहार के आईना तारीफ खुद की करो, खूबियां सब में जनाब होती है। अंधेरे घेर लें गर तुम को कहीं, तो दिल की आवाज़ आफ़ताब होती है। थपथपा लिया करो पीठ खुद की कभी, शिकायतें दुनिया को तो बेहिसाब होती है।